केबीसी शौ ने अपमानित किया, देश के वीरों को, पड़ेगी मांगनी माफी

आप लोग केबीसी के बारे में अच्छे से जानते हैं, हम सभी ने केबीसी कभी ना कभी देखा सुना जरूर होगा, सदी के महानायक श्री अमिताभ बच्चन लगभग 2 दशकों से इस शौ को होस्ट करते आ रहे हैं, जो कि अहम कारण है, इस शौ के पॉप्यूलर होने का, पिछले 2 दशकों से काफी चर्चा में रहे शौ ने बहुत ख्याती पाई, लोग इंतजार करते हैं केबीसी के नए सीजन आने का ।

लेकिन हालि में हुए एक विवाद ने केबीसी के निर्माता और होस्ट दोनों पर सवाल कर उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया है । दरअसल, केबीसी में पूछे गए एक सवाल में भारतीय मूल की शान कहे जाने वाले शिवाजी महाराज की तौहीन की गई, वो शिवाजी महाराज जो देश की शान थे, जो अमर हैं, आज भी अपने देश प्रेम के लिए, जो जिए देश के गौरव के लिए, जिन्होंने प्राण भी दिए तो देश के सम्मान के लिए ।

ऐसी वीर उपाधि ऐसे वीर महा बलशाली का सोनी टीवी पर चल रहे केबीसी में अपमान हुआ है, दरअसल, एक प्रश्न में अमिताभ बच्चन ने खेल रहे खिलाड़ी से पूछा के, इनमें से कौन से शासक सम्राट औरंगजेब के समकालीन थे, और ऑप्शन में शिवाजी महाराज की उपाधि लिखना गवारा तक नहीं समझा, केबीसी के इस सवाल पर इतना बड़ा बवाल हो गया, हिंदू समाज के लोग इसका विरोध कर रहे हैं, और हो भी क्यों ना, एक तरफ जब ऐसे शासक को इतनी इज्जत दी जा रही है, जो बहुत क्रूर था, तो वहीं दूसरी तरफ शिवाजी महाराज जैसे शासक जिसने देश के लिए जान तक न्योछावर कर दी, उनके सम्माम में नाम के आगे उनकी उपाधि तक ना लगाया जाना ।

प्रश्न में 4 ऑप्शन थे, जिसमें, महाराणा प्रताप, राणा सांगा, जैसे देश प्रमी राजा भी मौजूद थे, लेकिन महज छत्रपति शिवाजी की उपाधि नहीं लिखी थी, लोगों का मानना है कि ये एक पब्लिसिटी स्टंट था, जो शौ की टीआरपी तो बढ़ाने के लिए था, देखा जाए, तो ये एक सेक्यूलेरिजम स्टंट था, जो शौ की टीआरपी बढाने के लिए था, अब सोचने की बात ये है, कि कैसे किसी अभिव्यक्ति इतना आजाद है, कि वो देश के महान राजा, परमवीर छत्रपति शिवाजी की तौहीन कप सके महज अपने शौ की टीआरपी को बढ़ाने के लिए ।

आपको बताते हैं, कौन थे वीर शिवाजी महाराज, कौन थे महाराणा प्रताप, और कैसे अलग थे ये इन मुगल शासकों से ।

(छत्रपति शिवाजी महाराज)


19 फरवरी 1630 ये वो दिन है, जिस दिन जन्म लिया था, देश के उस शासक ने जो मिसाल बना, देश में वीरता की, दया की, गौ रक्षा की, इंसानियत की, शिवाजी महाराज जिनका नाम सुनकर ही दुश्मन मैदान छोड़ भाग खड़े उठते थे, जिसके नाम से गरीब खुश होता था, जिसे पूजा जाता था, शिवाजी का जन्म मराठा परिवार में हुआ, उनका पूरा नाम शिवाजी भोंसले था। शिवाजी के पिता का नाम शाहजी और माता जीजाबाई था, के पुत्र थे। उनका जन्म स्थान पुणे के पास स्थित शिवनेरी का दुर्ग है। राष्ट्र को विदेशी और आतताई राज्य-सत्ता से स्वाधीन करा सारे भारत में एक सार्वभौम स्वतंत्र शासन स्थापित करने का एक प्रयत्न स्वतंत्रता के अनन्य पुजारी वीर प्रवर शिवाजी महाराज ने भी किया था। इसी प्रकार उन्हें एक अग्रगण्य वीर एवं अमर स्वतंत्रता-सेनानी स्वीकार किया जाता है। महाराणा प्रताप की तरह वीर शिवाजी राष्ट्रीयता के जीवंत प्रतीक एवं परिचायक थे। आओ जानते हैं श्रीमंत छत्रपति वीर शिवाजी के बारे में।

शिवाजी पर मुस्लिम विरोधी होने का दोषारोपण किया जाता रहा है, पर यह सत्य इसलिए नहीं कि उनकी सेना में तो अनेक मुस्लिम नायक एवं सेनानी थे ही, अनेक मुस्लिम सरदार और सूबेदारों जैसे लोग भी थे। वास्तव में शिवाजी का सारा संघर्ष उस कट्टरता और उद्दंडता के विरुद्ध था, जिसे औरंगजेब जैसे शासकों और उसकी छत्रछाया में पलने वाले लोगों ने अपना रखा था।

शिवाजी की ताकत देख और उनके बढ़से वर्चस्व को देख चिंतित हो कर मुगल बादशाह औरंगजेब ने दक्षिण में नियुक्त अपने सूबेदार को उन पर चढ़ाई करने का आदेश दिया। लेकिन सुबेदार को मुंह की खानी पड़ी। शिवाजी से लड़ाई के दौरान उसने अपना पुत्र खो दिया और खुद को अपनी अंगुलियां तक गवानी पड़ी। औरंगजेब को मैदान छोड़कर भागना पड़ा। इस घटना के बाद औरंगजेब ने अपने सबसे प्रभावशाली सेनापति मिर्जा राजा जयसिंह के नेतृत्व में लगभग 1,00,000 सैनिकों की फौज भेजी।

लेकिन 1680 में बीमारी के चलते वीर छत्रपति शिवाजी ने दम तोड़ दिया, जिसके साथ अंत हुआ एक युग का वो चले गए लेकिन छोड़ गए अपने नेक कामों को, छोड़ गए उन बलिदानों को । उनके बाद उनके साम्राज्य को उनके बेटे संभाजी ने संभाल लिया।
(महारणा प्रताप)

 

वैसे तो भारत की भूमि ने अनेकों वीर जन्में हैं, उन महान योद्धाओ के जीवन, त्याग बलिदान और बहादुरी के गाथाओ से इतिहास भरा पड़ा है उनमे से प्रमुख रूप से महाराणा प्रताप | का भी नाम आता है जिनके बहादुरी के किस्से सुनकर लोग दातो तले ऊँगली दबा लेते है
महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान के कुम्भलगढ़ में हुआ था इनके पिता राणा उदय सिंह माता का नाम जयवंताबाई था महाराणा प्रताप के बचपन का नाम कीका था महाराणा प्रताप बचपन से बड़े प्रतापी वीर योद्धा थे तथा वे स्वाभिमानी और किसी के अधीन रहना स्वीकार नही करते थे वे स्वतंत्राप्रेमी थे जिसके कारण वे अपने जीवन में कभी भी मुगलों के आगे नही झुके उन्होंने कई वर्षो तक कई बार मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किये उनकी इसी दृढ वीरता के कारण बादशाह अकबर भी सपने में महाराणा प्रताप के नाम से कापता था महाराणा प्रताप इतने बड़े वीर थे की वे कई बार अकबर को युद्ध में पराजित भी किये थे ।
महाराणा प्रताप और अकबर हल्दीघाटी युद्ध
हल्दीघाटी की युद्द 18 जून 1576 को हुआ था यह युद्ध इतिहास के पन्नो में महाराणा प्रताप के वीरता के लिए जाना जाता है महज 20000 सैनिको को लेकर महाराणा प्रताप ने मुगलों के 80000 सैनिको का मुकबला किया जो की अपने आप में अद्वितीय और अनोखा है
इस युद्ध में मुगल सेना का संचालन मानसिंह और आसफ खां ने किया था जबकि मेवाड़ के सैनिको का संचालन खुद महाराणा प्रताप और हाकिम खान सूरी ने किया था इतिहासकारों की दृष्टि से देखा जाय तो इस युद्ध का कोई नतीजा नही निकलता दिखाई पड़ता है लेकिन महाराणा प्रताप के वीरता के मुट्ठी भर सैनिक, मुगलों के विशाल सेना के छक्के छुड़ा दिए थे और फिर फिर जान बचाने के लिए मुगल सेना मैदान छोड़ कर भागने भी लगी थी इस युद्ध की सबसे बड़ी यही खासियत थी की दोनों सेना का आमने सामने लडाई हुई थी जिसमे प्रत्यक्ष रूप से महाराणा प्रताप की विजय मानी जाती है ।
अब सवाल ये उठता है, कि ऐसे महान राजाओं के लिए, इतना अपमानजनक रवैया क्यों दिखाया जाता है, ये वो लोग हैं, जिन्होंने, देश के सम्मान के लिए, अपनी जान तक की कदर नहीं करी, देश की हिफाजत के लिए अपनी जान तक देदी, उन मुगल शासकों की बूरी नजर से देश को बचा कर रखा, लेकिन, देश में आज, कुछ सेक्यूलर लोग, इन महान लोगों के नाम पर राजनिति कर इनके नाम से टीआरपी बटोर ने के लिए इनके नामों को कलंकित कर रहे हैं, हिंदु समाज और हिंदू समाज के लोग कभी नहीं माफ करेंगे ऐसे लोगों को । जय हिंद

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