बड़े ओवैसी के बिगड़े बोल, बीजेपी को वोट देने वालों को बताया ‘छक्का’

अपनी तीखी जुबान से जहर उगलने वाले, हमेशा विवादों में घिरे रहने वाले, धर्म को बांटकर, धर्म का ठेका लेने वाले असदुद्दीन ओवैसी आज फिर एक बार अपने धर्म का बंटवारा करने वाले शब्दों की वजह से विवादों में घिर गए हैं, अकसर छोटे भाई अकबरुद्दीन के भाषणों में कही गई बेतुकि बातों को, अपनी दो तरफा सहज बातों से ढ़कने वाले असदुद्दीन ओवैसी, जो खुद हमेशा हिन्दुओं और देश के विरुध्द उनकी विचारधाराओं को कोसने का काम करते हैं, जो कहते हैं कि, “संविधान में राष्ट्रवाद नहीं लिखा”, “संविधान में हिन्दुओं के लिए अलग से कुछ नही है, कभी देश के खिलाफ तो कभी देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ, आग उगलते हैं, कल खुद मुस्लिम समाज में बैठे जहर उगलते और भड़काउ भाषण देते नजर आए। दरअसल AIMIM प्रमुख, नांदेड़, महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक, मुस्लिम जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जहां उन्होंने मुसलमानों से धर्म और मजहब के आधार पर, अपने ही धर्म के नेताओं को वोट देने की अपील की, लेकिन इतने में ही रुक जाते तो जनाब ओवैसी कैसे कहलाते, कभी राष्ट्रीय स्तर पर यूनिवर्सिटी क्रिकेट खिलाड़ी रहे ओवैसी ने क्रिकेट के संदर्भ में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का समर्थन करने वाले मुसलमानों को ‘छक्का’ तक कह डाला, क्योंकि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में 6% मुस्लिम वोट मोदी के खाते में गई थी…जिसे सुन कर जनता ने इस पर जोर जोर से तालियों का प्रदर्शन किया… अब भला ये कोनसे सभ्य समाज को दर्शाता है, या ये कोनसे सामाज का हिस्सा है…साफ शब्दों में धर्म को बांटने का काम करने वाले ओवैसी यहां ही नहीं थमे….अपने संबोधन के दौरान लोगों को खुदा का वास्ता देते हुए सेक्युलरिज़म भुला देने की बात भी की
उन्होनें कहा की हम मुसलमानों को अपने नुमाइंदों को ही वोट देने की जरूरत है… देश में उन्होंने सेक्युलरिज़म को ‘अस्पताल के वेंटिलेटर पर’बताया, याकूब मेमन की फाँसी को याद करते हुए, ओवैसी बोले की आगर संसद में हमारे 40 से 50 सांसद होते तो कांग्रेस पर सियासी दबाव बनाकर याकूब की फांसी रोकी जा सकती थी, कम से कम उसकी मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदला जा सकता था, लगता है, सठिया गए हैं बड़े मियां ( 2015 में तो भाजपा सरकार थी, तो वो कांग्रेस की मदद से कैसे फैसला बदल पाते ? ये तो समझ से परे है, और अगर राजनीतिक तरह से किसी की फांसी रोकनी हो तो प्रावधान यही है की गृह मंत्रालय से आज्ञा ली जाए, जो कि उस वक्त सत्ता में बैठी भाजपा के ही हाथ में रहता, कांग्रेस, 40-50 अतिरिक्त मुस्लिम सांसदों या ओवैसी के हाथ में नहीं।)
अब ये तो ओवैसी ब्रदर्स ही जाने के वो ऐसे बेतुके बयान, और ऐसे भड़काउ शब्दों का प्रयोग आखिर करते क्यों हैं……..

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