105 पर बीजेपी आउट, 56 पर भी शिवसेना नॉटआउट

महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव खत्म हुए काफी समय बीत गया है।लेकिन राजनितिक सियासत अभी तक गर्मायी हुई है। और सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात तो है ये है कि सत्ता में रहने वाली पार्टी भाजपा हरियाणा में हरने के बाद भी वहां अपनी सरकार बना चुकी है। लेकिन महाराष्ट्र में जीत कर भी हार गयी भाजपा। दरसल विधानसभा चुनाव में शिवसेना और भाजपा दोनों एक साथ चुनाव में खड़े हुए थे। दोनों के बिच 50 – 50 की बात हुई थी लेकिन तालमेल ठीक से नहीं बैठा है। और भाजपा ने अब साफ मन कर दिया है कि वो महाराष्ट्र सरकार नहीं बनाएंगी। तो वही शिवसेना ने साफ ऐलान कर दिया है कि किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। इसके लिए महाराष्ट्र की सर्कार में काफी हलचल व् गर्म है। कांग्रेस और एनसीपी समर्थन देने के लिए तैयार है।

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105 पर बीजेपी आउट लेकिन 56 पर भी शिवसेना नॉटआउट है। क्योकि बीजेपी ने अपने हथियार दाल दिए है और शिवसेना किसी भी कीमत पर अपनी सरकार बनाने के कोशिश में है। इसी कोशिश में शिवसेना ने बीजेपी के साथ की 1989 की दोस्ती अब 2019 में खत्म करने पर तुली हैं। अपनी इस कोशिश में शिवसेना ने ये साफ़ कर दिया है कि कुर्सी से बड़ा कुछ नहीं है।

महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस ने पार्टी वर्किंग कमेटी की बैठक अब खत्म हो गई है। बैठक से निकलने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सुबह दस बजे से चली इस बैठक में सही पहलुओं पर बात की गई है। आखिर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने यह तय किया है कि हम महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक करने के बाद ही किसी फैसले पर पहुंचेंगे उन्होंने बताया कि पार्टी ने महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को शाम चार बजे बैठक के लिए बुलाया है।

बता दें कि महाराष्ट्र में BJP सरकार नहीं बनाएगी यह अब साफ हो गया है. ऐसे में अब सभी की निगाहें एनसीपी कांग्रेस और शिवसेना पर है। एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने शिवसेना के साथ सरकार बनाने पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हम सरकार बनाने को लेकर कोई भी फैसला कांग्रेस से बात किए बगैर नहीं करेंगे। तो वही कांग्रेस पार्टी ने भी महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात को देखते हुए CWC की बैठक बुलाई है। और यही सब देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार में शामिल शिवसेना के इकलौते मंत्री अरविंद सावंत ने इस्तीफा भी देदिया है, और इस इस्तीफे से ये तो तय हो गया है कि शिवसेना एनडीए से बाहर हो गई है।

शिवसेना और बीजेपी की दोस्ती लगभग 30 साल पुरानी थी।सूत्रों के मुताबिक एनसीपी ने महाराष्ट्र के अंदर मिलकर सरकार बनाने के लिए शिवसेना के सामने शर्त रखी थी कि उसे पहले एनडीए से नाता तोड़ना होगा। और शिवसेना ने ऐसा ही किया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मे बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं। बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर बहुमत का 145 का आंकड़ा पार कर लिया था। लेकिन शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूले की मांग रख दी जिसके मुताबिक ढाई-ढाई साल सरकार चलाने का मॉडल था। शिवसेना का कहना है कि बीजेपी के साथ समझौता इसी फॉर्मूले पर हुआ था लेकिन बीजेपी का दावा है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था। इसी को लेकर दोनों के बीच मतभेद इतना बढ़ गया कि दोनों पार्टियों की 30 साल पुरानी दोस्ती तक टूट गई।

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