Thursday, April 18, 2024
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आर्टिकल 370 में खरी उतरीं यामी और प्रियामणि, महत्वपूर्ण विषय पर बनी संवेदनशील फिल्म, ज़रूर देखें…

फिल्म ‘उरी- द सर्जिकल स्ट्राइक’ का निर्देशन कर चुके आदित्य धर ने सत्य घटना पर आधारित एक और फिल्म ‘आर्टिकल 370’ बनाया है। जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के निरस्त किये जाने की घटनाओं से आम जनमानस बहुत अच्छे से परिचित हैं। लेकिन इस आर्टिकल को हटाने से पहले क्या-क्या तैयारियां की गयी, वह सब इस फिल्म में दर्शाया गया है। यह फिल्म जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने के प्रधानमंत्री कार्यालय के टॉप सीक्रेट फैसले पर आधारित है।

फिल्म ‘आर्टिकल 370’ की कहानी ही शुरूआत एक खुफिया अधिकारी जूनी हक्सर से होती है। जूनी हक्सर को आतंकवादी संगठन के युवा कमांडर बुरहान वानी के ठिकाने के बारे में पता चल जाता है और वह उसे मुठभेड़ में मार देती है। इस घटना से कश्मीर में जमकर पत्थरबाजी शुरू हो जाती है और इस घटना का जिम्मेदार जूनी हक्सर को मानकर दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया जाता है। जैसे ही सरकार आर्टिकल 370 को हटाने की दिशा में आगे बढ़ती है वैसे ही PMO सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन अपनी एक टीम तैयार करती है और कश्मीर में NAI ऑपरेशन का नेतृत्व करने के लिए जूनी हक्सर को चयनित करती है। जूनी हक्सर घाटी में शांति और एकता बनाए रखने के सफर में भ्रष्ट स्थानीय नेताओं और उग्रवादियों द्वारा वहां तमाम मुश्किलों से होकर गुजरती है।

बता दे, इस फिल्म की कहानी को करीब 6 अध्यायों में विभाजित किया गया है। इस फिल्म का पहला अध्याय आतंकवादी संगठन के युवा की कहानी से शुरू होता है। साल 2016 में उसकी मौत के बाद घाटी में बहुत से विरोध प्रदर्शन हुए, पत्थर बाजी हुई, जिसके बाद PMO सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन एक्टिव हो गई। ये कहानी फिर उस तह तक पहुंच जाती है जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाता है। इसके बाद भी सिचुएशन अधिक ज्यादा नहीं बदलती और साल 2019 में पुलवामा आतंकी हमला हुआ, जिसके बाद केंद्र सरकार एक्टिव हो गई और जम्मू कश्मीर के लिए एक आवश्यक फैसला लिया।

इस फिल्म में इस बात पर ज़ोर डाला गया है कि केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 हटाने से पहले कैसे जम्मू-कश्मीर संविधान की जांच की, उन कमियों की पहचान की, जिससे आर्टिकल 370 को हटाने में मदद मिली। एक पुराने सरकारी पुस्तकालय से मिली 1954, 1958 और 1965 के दस्तावेजों से कुछ ज़रूरी चीज़ों का पता चला, जिससे जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को बहुत पहले हटाया जा सकता था। बता दे, इस फिल्म की कहानी आदित्य धर ने मोनल ठाकुर के मिलकर लिखी हैं। फिल्म के निर्देशक आदित्य सुहास जंभाले ने फिल्म की कहानी के माध्यम से देशभक्ति की उत्तम भावनाओं को पर्दे पर पूरी तरह से दिखने में सफल हैं।

फिल्म की कहानी मुख्यतः दो किरदार जूनी हस्कर और PMO सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन के इर्द-गिर्द घूमती है। जूनी हस्कर के किरदार में यामी गौतम और PMO सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन के किरदार में प्रियामणि का फिल्म में दमदार प्रदर्शन रहा है। प्रधानमंत्री के रोल में अरुण गोविल और गृह मंत्री के रोल में किरन करमारकर का प्रदर्शन बहुत दमदार रहा हैं।

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