Thursday, April 18, 2024
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अगले महीने 58 की उम्र में सिद्धू मूसेवाला की मां बच्चे को जन्म देंगी, जानें क्या है वो प्रोसेस

सिद्धू मूसेवाला की मां की प्रेग्नेंसी की खबर इन दिनों चर्चा में बानी हुई है। ये बात लोगों के बीच बहुत ज़ोरों पर है कि क्या 50 साल से ऊपर की उम्र की महिलाएं IVF तकनीक के माध्यम से बच्चा कंसीव कर सकती है। अगर ऐसा संभव हो सकता है तो यह उनके लिए कितना सेफ हैं और महिलाओं को क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

पंजाब के मशहूर सिंगर सिद्धू मूसेवाला की मां अगले महीने यानी मार्च में बच्चे को जन्म देंगी। जानकारी के मुताबिक, मूसेवाला की मां ने अपनी 58 साल की उम्र में प्रेग्नेंसी के लिए IVF तकनीक का सहारा लिया है। हालांकि, इस खबर को लेकर अभी तक उनके माता-पिता की ओर से कोई भी बयान नहीं सामने आया है। बता दें कि सिंगर मूसेवाला अपने माँ – बाप के इकलौते संतान थे। साल 2022 के मई महीने में उनको सरेआम मौत के घाट उतार दिया था और इसका जिम्मेदार लॉरेंस विश्नोई गैंग को ठहराया गया था।

IVF क्या होता है ?
IVF मतलब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन। जिसे आमतौर पर टेस्ट ट्यूब बेबी भी कहा जाता है। इस तकनीक में  महिला की अंडेदानी से अंडे निकालकर उनका पुरुष के स्पर्म के साथ फैलोपियन ट्यूब में फर्टिलाइजेशन कराया जाता है। उसके बाद फर्टिलाइजेशन होने वाले एम्ब्रियो को महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है। यह उन महिलाओं के लिए एक वरदान की तरह साबित हुआ है जो आम तौर पर बच्चा कंसीव नहीं कर पाती हैं।

50 उम्र की महिलाएं IVF अडॉप्ट करने से पहले क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए
जानकारी के मुताबिक, 50 उम्र या इससे ऊपर की महिलाओं के गर्भधारण करने की संभावना काफी कम रहती है क्योंकि इस वक्त उनमें पीरियड्स साइकिल बनना बंद हो जाता है। लेकिन,  IVF तकनीक के माध्यम से 50 की उम्र पार कर चुकी महिलाएं भी मां बन रही हैं। इसके लिए उन्हें हार्मोनल इंजेक्शन देकर उनकी गर्भाशय को एक्टिव किया जाता है।

एक्सपर्ट्स का इस तकनीक पर यह कहना है कि, इस उम्र में अगर महिला मां बनना चाह रही है तो उसे पूरा अपने पूरे शरीर की जांच जरूर कराना चाहिए।इससे यह पता चल सकेगा कि महिला किसी स्वास्थ्य समस्या से तो नहीं जूझ रही है, जो बच्चा कंसीव करने की उसकी क्षमता में बाधा डाल सकता है। साथ ही ओवरीज, यूटेरस सहित सभी रिप्रोडक्टिव अंगों का चेकअप भी करा लेना चाहिए।

इसके साथ ही महिलाओं को डायबिटीज, बीपी और ब्लड टेस्ट भी अवश्य करना चाहिए। अगर उस महिला का पहले की गर्भावस्था के दौरान किसी तरह का कांप्लिकेशन, क्रोमोसोमल एब्नॉर्मिलिटी और मिसकैरेज का हुआ है, तो यह जानकारी भी सामने आनी चाहिए क्यूंकि ये सभी स्थितियां महिला के लिए गर्भावस्था में एक समस्या बन सकती हैं। महिला की शारीरिक अवस्थाके साथ-साथ मानसिक स्थिति की भी जांच होना चाहिए की वह IVF के द्वारा मां बनने को तैयार है या नहीं।

IVF के दौरान महिलाओं को आ सकती हैं ये समस्याएं
एक्सपर्ट के मुताबिक, IVF एक कठिन प्रोसेस होता है। इस प्रोसेस की मदद से बच्चे को जन्म देने तक महिला को बहुत सी तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। इस दौरान एक से ज्यादा बच्चे, प्रीमैच्योर डिलीवरी, ओवरिअन हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम,गर्भपात, कुछ एलेर्जी या इन्फेक्शन का खतरा, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, स्ट्रेस जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

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